केंद्र सरकार ने राशन कार्ड योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये नए नियम 2025 में लागू होंगे और इनका मुख्य उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है। इन नियमों से योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
सरकार ने इन नियमों को इसलिए लागू किया है क्योंकि कुछ लोग अनुचित तरीकों से राशन कार्ड बनवाकर योजना का लाभ उठा रहे थे। नए नियमों के तहत, ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है और डिजिटल राशन कार्ड की व्यवस्था की गई है।
योजना का वित्तीय प्रभाव
इस योजना पर सरकार का कुल खर्च लगभग 12 लाख करोड़ रुपये होगा। इससे देश के 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को लाभ मिलेगा। योजना के तहत प्रति परिवार को मासिक राशन के साथ-साथ 1000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
पात्रता के नए मानदंड
नए नियमों में पात्रता के मानदंडों को और अधिक स्पष्ट किया गया है। शहरी क्षेत्रों में 3 लाख रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवार ही योजना के पात्र होंगे। इसके अलावा, संपत्ति और वाहन स्वामित्व के आधार पर भी पात्रता तय की गई है।
राशन की नई मात्रा
नए नियमों के तहत प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज दिया जाएगा, जिसमें 3 किलो चावल और 2 किलो गेहूं शामिल है। यह मात्रा पोषण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है।
डिजिटल व्यवस्था का महत्व
भौतिक राशन कार्ड की जगह अब डिजिटल राशन कार्ड का प्रयोग किया जाएगा। इससे राशन वितरण में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। ई-केवाईसी अनिवार्य होने से फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी।
आवेदन प्रक्रिया
राशन कार्ड के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। नए आवेदकों को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा और पात्रता की जांच के बाद ही कार्ड जारी किया जाएगा।
नए नियम राशन वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाएंगे। इससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों को योजना का लाभ मिलेगा और साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार होगा। यह कदम गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
[नोट: यह जानकारी सरकारी घोषणाओं पर आधारित है। कृपया नवीनतम अपडेट के लिए स्थानीय राशन कार्यालय से संपर्क करें।]